श्री खाटू श्याम जीखाटूनरेश
‖ हारे का सहारा ‖
कलियुग के देवता श्री खाटू श्याम जी का परम भक्ति धाम — चालीसा, आरती, भजन, कथा, मेला और लाइव दर्शन एक ही स्थान पर।
- धाम स्थापना१०२७ईस्वी सन
- हर सप्ताह श्याम के भक्त२० लाखखाटू · सीकर · राजस्थान
- श्याम का वचनहारे का सहाराकलियुग के देवता
धाम परिचय
आगामी पर्व
२०२७
फाल्गुन मेला
१२ – १९ मार्च
लाखी मेला — खाटू में श्याम बाबा का सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव। एकादशी पर मुख्य आरती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- ०१
खाटू श्याम जी को हारे का सहारा क्यों कहते हैं?
महाभारत के युद्ध में जब बर्बरीक ने अपना शीश दान किया, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वही श्याम के नाम से पूजे जाएंगे और हारे हुए लोगों का सहारा बनेंगे। इसीलिए जो भी सच्चे मन से खाटू में दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
- ०२
खाटू श्याम जी कौन हैं और बर्बरीक से क्या संबंध है?
खाटू श्याम जी महाभारत के बर्बरीक हैं — भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र। उन्हें सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर माना जाता है। श्रीकृष्ण के वरदान से वे कलियुग में श्याम के रूप में पूजे जाते हैं। उनका मुख्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में खाटू गाँव में स्थित है।
- ०३
खाटू श्याम मंदिर कैसे पहुँचें?
खाटू श्याम मंदिर जयपुर से लगभग ८० किमी और दिल्ली से २७० किमी दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन रींगस जंक्शन है, जो खाटू से १७ किमी की दूरी पर है। रींगस से टैक्सी, बस और ऑटो आसानी से उपलब्ध हैं। दिल्ली व जयपुर से नियमित बस सेवाएँ भी संचालित हैं।
- ०४
फाल्गुन मेला कब है?
फाल्गुन मेला २०२७ में १५ से २१ मार्च तक आयोजित होगा। मुख्य दिन १८ मार्च (फाल्गुन शुक्ल एकादशी) है, जिस दिन निशान यात्रा और विशेष आरती होती है। यह वर्ष का सबसे बड़ा लाखी मेला है, जिसमें २० लाख से अधिक भक्त खाटू पधारते हैं।
- ०५
आरती के समय क्या हैं?
मंदिर में प्रतिदिन पाँच आरतियाँ होती हैं। शीत ऋतु में — मंगला (५:३० प्रातः), श्रृंगार (८:०० प्रातः), भोग (१२:३० दोपहर), संध्या (६:३० शाम), शयन (९:०० रात्रि)। ग्रीष्म ऋतु में — मंगला (४:३०), श्रृंगार (७:००), भोग (१२:३०), संध्या (७:३०), शयन (१०:००)। पूरी लाइव सूची दर्शन पृष्ठ पर देखें।
— श्री श्याम चालीसाखाटू नगर में जन्म लियो है,
नाम "बर्बरीक" तेरो धरयो है।
हारे के तुम सहारे प्यारे,
मनवांछित फल देने हारे।

